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रविवार, 1 अगस्त 2021

ममता बनर्जी की दिल्ली प्रवास(चौबे जी दुबे बने )

ममता बनर्जी का दिल्ली आना और विपक्षी एकता की हर संभव प्रयास करना इस कहावत को चरितार्थ करता है कि चौबे जी आ

ये थे छब्बे बनने दुबे बन कर आये

ममता बनर्जी का दिल्ली प्रवास कुल मिलाकर 5दिन का रहा जिसमे चार रात उन्होंने दिल्ली मे बिताया यानि पाँच दिन दिल्ली का प्रवास था समय भी उन्होंने ऐसा चुना था ज़ब संसद सत्र चल रहा है और उनके आने के काफ़ी पहले से यशवंत सिन्हा और प्रशांत किशोर दिल्ली मे विपक्षी एकता का मंच तैयार करने लगे थे आखिर दिल्ली तो दिल्ली है केंद्र कि राजनीती राज्यों की राजनीती से एकदम भिन्न होता है शायद ये ममता नहीं समझ पायी थी इसके बाद भी वो इस बात को याद नहीं रख पायी ज़ब उन्होंने अन्ना हजारे समाजसेवी के साथ मिलकर आंदोलन की रुपरेखा तैयार की उसके बाद उस आंदोलन का क्या हश्र हुआ और हंसी हसारत हुई थी खैर उनको लगा होगा की बंगाल की तीसरी विजय उनको दिल्ली की कुर्सी दिला ही देगी सारे विपक्षी नेता उनके पीछे खड़े हो जायेंगे और उनसे अनुरोध करेंगे की मोदी रूपी राक्षस (जो विपक्षी दल के नेता मानते है ) से उनको मुक्ति दिलाये और वो देवी बनकर अब पुरे देश से भाजपा और मोदी अमित शाह को हरा सकती है वैसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने और कुंए का मेंढक वाली चरितार्थ होती दिख रही है मै आज तक नहीं समझ पाया की किस ताकत और हैसियत से किसी एक राज्य का मुख्यमंत्री जो केवल एक राज्य तक हो पुरे देश को छोड़िये पडोसी राज्य मे भी कोई संगठन नहीं है और ना ही दूसरे राज्य मे एक भी सीट जितने की हैसियत हो प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखना और ख्वाब को पुरे देश को बताना शायद उनकी मानसिक स्थिति की अपरिपक्वता का परिचायक ही है जो मुख्यमंत्री अपने राज्य मे चुनाव बाद की हिंसा से आँख मुंद कर रखे या अप्रत्यक्ष प्रोत्साहित करें अपराधियों को बचाने का काम करें कोई एफ.आई. आर ना दर्ज कराये, जो पुलिस स्टेशन मे शिकायत लेकर जाये उल्टा उसी को प्रताड़ित किया जाय, निष्पक्ष शासन की बात ना करें और व्यवहार मे लाये, क़ानून का शासन ना करके, तानाशाही पूर्ण रवैया, पक्षपात से परिपूर्ण हो, लोकतंत्र मे विश्वास ना करें, संवैधानिक संस्थाओ को नष्ट करें चाहे चुनाव आयोग, न्यायपालिका हो केंद्रीय सुरक्षा बल हो आदि हो वो भारत जैसे महान लोकतंत्र राष्ट्र का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखें भारतीय जनता को मुर्ख समझने का प्रयास ही है

... क्रमशः



TBV

Naveen Pandey

ममता बनर्जी की दिल्ली प्रवास(चौबे जी दुबे बने )

ममता बनर्जी का दिल्ली आना और विपक्षी एकता की हर संभव प्रयास करना इस कहावत को चरितार्थ करता है कि चौबे जी आ ये थे छब्बे बनने दुबे बन कर आये म...